कन्या भ्रूण हत्या : एक महापाप

कन्या भ्रूण हत्या....
                         इसे लोगो की छोटी सोच कहे या बुरी मानसिकता , जिससे आज पूरा भारत ग्रस्त है।

एक तरफ जहां भारत मे औरत को देवी मानकर पूजा जाता था वही आज यह हालत है जहां मासूम कन्या का लिंग परीक्षण करके उसे गर्भ में मार दिया जाता है।



आखिर क्यों?? कब तक??

अगर इस तरह की शर्मनाक घटनाओ के पीछे कि वजह जानने की प्रयत्न करेंगे तो और भी  लज्जित होंगे।


कन्याओ को बोझ समझा जाता है ...जो दो घरो का बोझ उठाती है।

कन्याओ को वंश क्रम में बाधित माना जाता है...जिससे वंश उत्पन्न होता है।

कन्याओ को कमजोर, निर्बल माना जाता है...जो अपनी जान हथेली पर रखकर औलाद को जन्म देती है।

कन्याओ को दहेज देना पड़ता है....जबकि इस कुप्रथा को हमने ही चलाकर लाखो बच्चियों का जीवन दुष्कर बना दिया है।

बेटी नही होगी...तो बहु कहां से लाओगे?

लिंग परीक्षण प्रतिषेध अधिनियम,1994 के द्वारा अल्ट्रा सोनोग्राफी द्वारा लिंग जांच करवाना कानूनी अपराध है।




         कन्या भ्रूण हत्या पर रोक 

संत रामपाल जी महाराज जी एक ऐसे संत है जिन्होंने इसे कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने का बीड़ा उठाया है।

संत रामपाल जी महाराज जी के आज करोड़ो अनुयायी अपने बच्चों की शादी बिना किसी भी दहेज व दिखावे के करते है जिससे कन्या को बोझ नही समझा जाता है उनका लिंग परीक्षण से गर्भपात नही कराया जाता है।

संत रामपाल जी ने लोगो की लिंग भेद के प्रति मानसिकताओ को बदलने के लिए सभी को एक परमात्मा की संतान बताया है सभी मे एक समान आत्मा होती है।

संत रामपाल जी ही एक ऐसे संत है जो समाज की इन कुरीतियो और बुरी मानसिकताओं को दूर कर धरती को स्वर्ग बना रहे है।


     
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