महामारी में बेरोजगारी
कोरोना वायरस से उत्पन्न इस महामारी के दौर में प्रति हफ्ते बेरोजगार की संख्या बढ़ रही है। एक तरफ सभी होटल, रेस्टोरेंट , मॉल्स आदि बंद करने से वहाँ कार्यरत श्रमिको का रोजगार तो प्रभावित हुआ ही है साथ मे किसी न किसी क्षेत्र में कार्य कर रहे कर्मचारियों को नोकरियो से निकालने, उनके वेतन में कटौती करने जैसी खबरें भी आ रही है जो स्थिति को और भी गंभीर बना रही है। देश को आर्थिक रूप से बहूत नुकसान पहुंच रहा जीडीपी रेट गिर रही है ऐसे में मजदूरों को उनके कार्य के मुताबिक वेतनमान के नही मिलने से संकट में संकट की घड़ी आ गयी है। लेखक डेविड ब्लूस्टैन कहते है कि " बेरोजगारी की वैश्विक महामारी आने वाली है" । मनोवैज्ञानिक कहते है कि रोजगार जाने का दुःख किसी अपने को खोने के दुःख के बराबर होता है , ऐसे में व्यक्ति द्वारा परिस्थिति स्वीकार नही करना, गुस्सा करना तथा सदमे में चले जाने जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आज की बेरोजगारी की स्थिति अस्थायी है और जब स्थिति नियंत्रण में हो जाएगी तो लोग दुबारा काम पर लौटेंगे